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मेघ का उत्तर

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आजकल
        
                                                    
                            
मेघ भी जैसे
अजीब-सा उपहास करते हैं।

कहीं पीड़ा है
अल्पवृष्टि की,
तो कहीं प्रलय
अतिवृष्टि का।

कहीं लोग
जल की एक-एक बूँद को तरसते हैं,
तो कहीं
बाढ़ का उफान
जीवन बहा ले जाता है।

मैंने पूछा मेघ से,

“क्यों करते हो
यह अन्याय?”

मेघ हँसा,
गर्जना की गूँज के साथ बोला,

मैं बरसता वहीं हूँ
जहाँ तरुवर करते है स्वागत
बाँहें फैलाकर मेरा

तुमने जंगल काट दिए,
फिर मुझसे उम्मीद क्यों,
बराबरी की वर्षा की?”

थम गई उसकी गर्जना…

पर अब भी
गूँज रहा है
मेरे भीतर
उसका प्रश्न।
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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