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आज भी आपको सोच कर यही दुआ मांगी मैने

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज अलमारी खोलते ही एक साड़ी सामने आ गई
        
                                                    
                            
उसे छूते ही माँ तुम्हारी याद आ गई
आँखों में आंसू और होंठों पर मुस्कान छा गई।

साड़ी में से झलकता तुम्हारा एहसास
एक पल को लगा की माँ तुम हो पास।

बस कपड़ा नहीं तुम्हारा प्यार है इसमें
सपने ,आशीर्वाद और दुलार है इसमें।

साड़ी के आँचल को जब हाथ में थामा मैंने
सारा बचपन उस लम्हे में जी लिया मैंने।

तुम्हारी साड़ी ही तो थी जिसे पकड़कर चलना सीखती थी मैं
हर जिद,आंसू और कुछ खाकर अपना मुँह
उसी साड़ी से पोंछती थी मैं।

दूर रहकर भी तुम मुझसे दूर नहीं होती हो माँ
जब भी याद करूं तुमको इस साड़ी के साये में
तुम लिपटी होती हो माँ।

आज भी आपको सोच कर यही दुआ मांगी मैने
जन्म लूं,चाहे कितने भी बस तुम्हीं बनो मेरी माँ
बस तुम्हीं बनो मेरी माँ।
-पायल शर्मा जयपुर
2 महीने पहले
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