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भक्तों के भगवान श्रीकृष्ण सदा ही देते हैं संदेशा

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            श्याम सलोने मोरे कान्हा मोर मुकुट सुहाए,
        
                                                    
                            
पीताम्बर को धारण कर अनुपम छवि लुभाए,
अधर पर बंसी बजती मधुर तान सुनाए,
मुरली धर की छवि देख मन वृंदावन हो जाए।

कान्हा गोपिन मटकी फोड़े माखन चट कर जाएं ,
उलाहना देती बार-बार पर मन ही मन मुस्काएं,
ग्वाल बाल संग गाय चराएँ नंदलाला मतवाले,
गैयन बंसी की धुन सुनते अपनी सुध-बुध खोएं।

बांसुरिया धुन पर राधिका नयनों में है खोई ,
इक सजी कान्हाअधरों पर दूजी प्यासी रह गई,
राधा कन्हैया रास रचें प्रेम प्रीति छलकाएं ,
यमुना में स्नान करें तब कान्हा वस्त्र छिपाएं।

जमुना तट पर खेल रचाया गेंद गई गहरे तल में,
कूद पड़े कान्हा अकेले यमुना के जल कल में,
कालिया मर्दन फन ऊपर नाचे नटवर प्यारे,
नाग दर्प को चूर किया तब जय जय बोले सारे।

इन्द्र प्रकोप ब्रज में देखो जल ही जल था छाया,
हाहाकार मचा था कान्हा को फिर ध्याया।
गोवर्धन को कनिष्का पर गिरिधारी ने उठाया,
सात दिनों फिर ब्रजजन को संकट से बचाया।

भक्तों के भगवान श्रीकृष्ण सदा ही देते हैं संदेशा,
कर्म पथ अविराम डटे रहो गीता का उपदेशा,
कर्म करो पर फल इच्छा छोड़ो देते ऐसा ज्ञान,
अर्जुन के सारथी बन कर जग को देवें सज्ञान।
-कुमकुम माथुर
 
एक महीने पहले
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