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ख़्वाबों का आशियाँ

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुबह हुई तो शहर भी जागा,
        
                                                    
                            
राहों ने आवाज़ लगाई,
दौड़ते चेहरों के संग हमने,
फिर अपनी रफ़्तार मिलाई।
मंज़िल चाहे दूर अभी हो,
दिल में ऊँची उड़ान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

दिन भर जाने कितने चेहरे,
अपने क़िस्से साथ लिए,
कोई निकला नाम कमाने,
कोई बेहतर कल के लिए।
हम भी अपनी राह चले हैं,
अपनी एक पहचान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

ऊँची-ऊँची इन इमारतों में,
अपना भी इक ख़्वाब पले,
आज छोटा-सा घर है अपना,
कल कुछ और उजाले मिलें।
छोटा नहीं कुछ चाहा हमने,
ऊँचा अपना आसमान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

पैसे आए, खर्चे आए,
संग कई हिसाब भी आए,
कुछ ख़्वाहिश इस बार सजी तो,
कुछ ने अगले ख़्वाब सजाए।
आज सँभाला, कल सँवारेंगे,
ख़ुद पर इतना मान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

बारिश आई, राहें भीगीं,
शहर मगर चलता ही रहा,
धूप चढ़ी तो पाँव थके पर,
मन मंज़िल को तकता रहा।
रुकना अपनी आदत कब थी,
चलना अपनी शान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

ज़िंदगी की इस भागमभाग में,
वक़्त कहाँ रुक पाता है,
आज सँवरते-सँवरते अक्सर,
कल चुपके से आ जाता है।
वक़्त भले ही तेज़ चले पर,
अपना भी इक मुक़ाम है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

शाम ढले जब घर को लौटें,
अपनों की मुस्कान मिले,
दिन भर की सारी थकन को,
दो पल का आराम मिले।
कल फिर नई सुबह बुलाए,
फिर अपना आसमान है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।

बहुत मिला है इस शहर से,
अभी बहुत कुछ पाना है,
एक मुक़ाम पे ठहरें क्यों हम,
आगे बढ़ते जाना है।
एक दिन सपनों का आशियाँ हो,
बस इतनी-सी चाहत है,
आँखों में कुछ ख़्वाब बड़े हैं,
दिल में नया अरमान है।
— संतोष कुमार शर्मा
 
2 घंटे पहले
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