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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुझसे बिछड़ने के बाद सनम
        
                                                    
                            
बर्बाद करता रहा ख़ुद को मैं
जैसे जीने की सोची ही नहीं
बीमार करता रहा ख़ुद को मैं
मैं होश अपना परखता रहा
नशे में मुसलसल बिखरता रहा
पता था मुझे जो पता वो न था
मेरा प्यार करना ख़ता तो न था
मगर इक सज़ा सी मिली उम्र भर
मगर मैं गुनाहगार बन के जिया
जिया मुझसे जाता रहा तो नहीं
मगर मर न पाया, नहीं मौत आई
समझ जाएगी थाम कर तू कलाई
मैं आंसू तेरी आंख का हूं सनम
मैं तेरी ख़ुशी हूं, मैं हूं तेरा ग़म
मैं कुछ और कहना नहीं चाहता
मैं दुनिया में रहना नहीं चाहता
यही ज़िन्दगी है, इसी की क़सम
- मृदुल
2 महीने पहले
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