तुम हारोगे ये निश्चित है
पर जीत गए तो क्या
तुम गिर जाओगे निश्चित है
पर उठ गए तो क्या
ठोकर खाओ मुंह की खाओ
कदम कदम पर हर जाओ
एक दो से नहीं
जब तुम सब ही हार जाओ
पर मन से जो हारे नहीं
मन से जो भागे नहीं
एक दिन उठ के बोलोगे
मैदान अकेले डोलोगे
सबकुछ फतेह कर जाओगे
जो मन से तुम जीत पाओगे