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कभी पूछे हो उस शहीद जवान को घर बालों से ?

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी पूछे हो उस शहीद जवान को घर बालों से ?
        
                                                    
                            

कभी पूछो उस माँ को,
जिसका बेटा शहीद हुआ है,
जिसने अपने आँचल में पाला,
आज वही तिरंगे में सोया है।

कभी पूछो उस माँ को,
जिसने अपनी जान से बढ़कर
अपने रतन को पाला था,
आज उसी रतन को उसने
देश के दिया है।

कभी पूछो उस माँ को,
जिसने आँचल से बड़ा किया,
आज वही माँ अपने रतन को खोकर
चुपके-चुपके रोई है।

कभी पूछो उस माँ को,
जिसका लाड़ला दूर गया है,
ओर वो कभी वापस नहीं आया।

कभी पूछो उस माँ को,
जिसका ममत्व छिन गया है,
अचानक उससे छोड़ के चला गया है।

कभी पूछो उस बाप को,
जिसका लाड़ला उसे छोड़कर चला गया,
जिसे उँगली पकड़कर चलना सिखाया था,
वही हाथ आज छोड़कर चला गया।

कभी पूछो उस बाप को,
जिसका हाथ पकड़कर
चलना सीखा था,
आज वही बेटा इस दुनिया को
छोड़ के चला गया।

कभी पूछो उस बाप को,
जिसने अपने कंधों पर बिठाकर
बेटे को दुनिया दिखाई थी,
आज वो दुनिया छोड़ के चला गया।

कभी पूछो उस बाप को,
जिसने अपने सपने त्यागकर
अपने बेटे के सपने पूरे किए थे,
आज उसी बेटे ने
अपने प्राण देश के नाम किए हैं।

कभी पूछो उस बहन को,
जिसकी कलाई पर हर साल
भाई राखी बाँधा करता था,
जिसे हर मुश्किल में भाई
अपनी रक्षा का वचन देता था,
आज वही भाई
राखी का धागा छोड़कर चला गया।

कभी पूछो उस बहन को,
जिसने अपना भाई खोया है,
जिसके साथ हँसते-खेलते
बड़ी हुई है।

कभी पूछो उस पत्नी को,
जिसने अपना सिंदूर खोया है,
जिसने अपना मंगलसूत्र खोया है,
जिसने अपना सुहाग खोया है।

कभी पूछो उस पत्नी को,
जिसने अपने प्रेम को
आँखों के सामने खोते हुए देखा है।

कभी पूछो उस पत्नी को,
जिसका प्रेम तो आज भी ज़िंदा है।

कभी पूछो उस घर के लोगों से,
जिनके घर में खुशियाँ चली गई है।

कभी पूछो उस घर के लोगों से,
जिनके घर का दीपक चला गया है—
देश को एक शहीद मिला है।

- हिमेश कुमार बारीक्

 
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