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आईना भी नहीं पहचाने हमें

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आईना भी नहीं पहचाने हमें
        
                                                    
                            
कोई होगा कि कौन जाने हमें
हमको उड़ना हवा सिखाती है
आसमान आसमान माने हमें
ख़ाक में मिल के चैन आएगा
धूँढ़ने आए हैं ज़माने हमें
आरज़ू दिल की ही है दर्द - ए - दिल
ये किसी तरह दो मिटाने हमें
हक़ की हमसे तो बात मत करना
ये मौसम क्या लगे बताने हमें
अपनी तकदीर लिए फिरते हैं
कहीं जाना है चोट खाने हमें
हां तमन्नाएं मार लेते हैं
नहीं अफ़सोस भी जताने हमें
ज़िन्दगी एक बार फिर मिलना
तुझसे फिर होंठ हैं मिलाने हमें
मौत ऐसी तो हज़ारों मर के
हमने देखी हैं ज़ीस्त माने हमें
मुश्किलों से सबक लिया करिए
ख़्वाब आते हैं अब जगाने हमें
'रंग' जो ख़ुद से भी रहें ख़ाली
रास आते हैं वो अफ़्साने हमें
- मृदुल 'रंग'
4 घंटे पहले
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