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आईना भी नहीं पहचाने हमें

                
                                                         
                            आईना भी नहीं पहचाने हमें
                                                                 
                            
कोई होगा कि कौन जाने हमें
हमको उड़ना हवा सिखाती है
आसमान आसमान माने हमें
ख़ाक में मिल के चैन आएगा
धूँढ़ने आए हैं ज़माने हमें
आरज़ू दिल की ही है दर्द - ए - दिल
ये किसी तरह दो मिटाने हमें
हक़ की हमसे तो बात मत करना
ये मौसम क्या लगे बताने हमें
अपनी तकदीर लिए फिरते हैं
कहीं जाना है चोट खाने हमें
हां तमन्नाएं मार लेते हैं
नहीं अफ़सोस भी जताने हमें
ज़िन्दगी एक बार फिर मिलना
तुझसे फिर होंठ हैं मिलाने हमें
मौत ऐसी तो हज़ारों मर के
हमने देखी हैं ज़ीस्त माने हमें
मुश्किलों से सबक लिया करिए
ख़्वाब आते हैं अब जगाने हमें
'रंग' जो ख़ुद से भी रहें ख़ाली
रास आते हैं वो अफ़्साने हमें
- मृदुल 'रंग'
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49 मिनट पहले

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