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अपना प्यार याद करते हैं

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपना प्यार याद करते हैं
        
                                                    
                            
उसमें हो तो गई इबादत
हम जीते हैं हम मरते हैं
हसरत - हसरत, आदत - आदत
रोने को दिल क्यों करता है
हंसी में टाल रहा हूं हर बात
कितने ख़ून करा देती है
उसकी हस्ती, उसकी राहत
फ़िक्र जो की तो ज़िक्र तो होगा
उसके बाद की फिर देखेंगे
सोचना पर क़ानूनन जुर्म है
समझने की कुछ नहीं इजाज़त
सच्चाई शीशे सी साफ़
दिखा के मैं धुंधला जाऊंगा
राजनीति कहते हैं इसको
इसका ही है नाम सियासत
अपना गुनाह 'रंग' ने माना
सांस - सांस अपनाई सज़ा
हाय ज़िन्दगी, वाय तिश्नगी,
हाय - हाय बर्बाद मोहब्बत
2 महीने पहले
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