अपना प्यार याद करते हैं
उसमें हो तो गई इबादत
हम जीते हैं हम मरते हैं
हसरत - हसरत, आदत - आदत
रोने को दिल क्यों करता है
हंसी में टाल रहा हूं हर बात
कितने ख़ून करा देती है
उसकी हस्ती, उसकी राहत
फ़िक्र जो की तो ज़िक्र तो होगा
उसके बाद की फिर देखेंगे
सोचना पर क़ानूनन जुर्म है
समझने की कुछ नहीं इजाज़त
सच्चाई शीशे सी साफ़
दिखा के मैं धुंधला जाऊंगा
राजनीति कहते हैं इसको
इसका ही है नाम सियासत
अपना गुनाह 'रंग' ने माना
सांस - सांस अपनाई सज़ा
हाय ज़िन्दगी, वाय तिश्नगी,
हाय - हाय बर्बाद मोहब्बत