जो देखा जो सुना गया
वो सबकुछ ही कहा गया
समझ न आई कोई बात
मगर मर्म झिलमिला गया
किसी से क्या पूछूं अब मैं
कौन मुझे क्या बता गया
शराब पी कर लिखता हूं
मौसम मौसम सिखा गया
ऐसे होते हैं रिश्ते
वैसे वो क्या जला गया
ये तो कोई कहानी है
वक़्त सुनाता चला गया
चला गया मैं दुनिया से
ये दुनिया को बता गया
कौन सा काम मुझे आया
इश्क़ किया तो किया गया
मुझे मज़ा आता है 'रंग'
और सो देता सज़ा गया