हाथ में ये घड़ी मेरे किस काम की..
वक्त मेरा तो अब कटता ही नहीं...
जबसे देखी है मैने ये दुनिया यहां..
दुनियादारी में भी मन लगता नहीं...
हाथ में ये घड़ी मेरे किस काम की..
जबसे तुम हो गए मुझको छोड़कर...
में खड़ा हूं वही उस जगह मोड़ पर...
आते जाते फरिश्ते बहुत है मगर...
साथ मुझको कोई लेके चलता नहीं...
रस्ते पर पड़ा उड़ रहा हूं यहां...
कोई बादल भी मुझ पर बरसता नहीं...
थक चुका हूं बहुत खुद के जीवन से में...
वक्त से पहिले क्यूं कोई मरता नहीं...
हाथ में ये घड़ी मेरे किस काम की...
वक्त मेरा तो अब कटता ही नहीं...
-आशीष सिंह