दिलों के दर्द दुनिया को दिखाना छोड़ देते हैं,
ये किस्सा दर्द का सबको सुनाना छोड़ देते हैं।
वो जिनको हमसे मिलने की तमन्ना ही नहीं होती,
उन्हें हम महफ़िलों में अब बुलाना छोड़ देते हैं।
सराबों के तआक़ुब में भला क्या फ़ायदा हासिल,
खुली आँखों से अब सपने सजाना छोड़ देते हैं।
हक़ीक़त जान ली है अब फ़रेब-ए-रंग-ए-दुनिया की,
तो फिर इस शहर-ए-वीराँ में ठिकाना छोड़ देते हैं।
ख़ुदा के वास्ते अब हमको जीने दो मेरे यारो,
नए ख़्वाबों की अब शम्माएँ जलाना छोड़ देते हैं।