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चेहरा जो दुनिया का बदलते देखा है

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन रति राहों पर लोगों को भटकते देखा है
        
                                                    
                            
कितनी उम्मीदों पर पानी को फिरते देखा है
ढूंढते रह गए अपना ठिकाना
चेहरा जो दुनिया का बदलते देखा है

ना राह पूछते हैं ना ठिकाना कोई अब
जिस राह पर आकर भटके हैं
उसे ही अपना बनाना है सही अब
मुस्कुराती हर सुबह को गुजरते देखा है

चेहरा जो दुनिया का बदलते देखा है

ना जाने क्यों भटके हुए हैं छिपे चहरे वाले
ना यहां ठहरते हैं ना वहां ठहरते हैं
अपने अल्फाजों से आशिया बना लेते हैं
जहर घोलने वाले
ऐसे ही चेहरों को एक दिन तरसते देखा है

चेहरा जो दुनिया का बदलते देखा है
-अर्ली गीत
 
3 महीने पहले
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