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बिटिया की अंतर्मन

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बाबा ओ मेरे बाबा
        
                                                    
                            
मुझे मत बांधों किसी निर्मम के खूंटे से।
ऊंची कोठी,बड़ी गाड़ी, ऐसों आराम
नहीं चाहिए खैरात में हमें।

बाबा ओ मेरे बाबा
मत लगाओ अपनी जीवन भर की कमाई दांव पर
खेत बेच कर अपनी ख्वाहिशें खाक कर।
क्या खरीद पाओगे मेरे लिए
वो इज्जत वो सम्मान, किसी के घर में वो स्थान।
वो नजर कहां से दोगे ,जिस नाजों से पाला है आपने।।

बाबा ओ मेरे बाबा
देना ही है तो ऐसा आत्मविश्वास दो।
कभी हारूं नहीं चाहे हो जीवन का कोई डगर।
मैं इतना कभी बेबस ना हो जाऊ
कोई मुझे जख्मी कर जाए, ना गले में फंदा डाल पाए।
आग में झुलसा दे ,या कोई करके बहाना ।।
बाबा ओ मेरे बाबा
ले जाए तुझसे इतनी दूर
कि फिर कभी ना मैं पुकार सकूं।
बाबा ओ मेरे बाबा।।
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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