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झुकाव

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                            झुकाव कभी बराबर नहीं रहता,एक तरफ बढ़ ही जाता है!
        
                                                    
                            
चाहे तराज़ू हो या मां, रिश्ते हों या किश्ती, सब एक तरफ बढ़ जाते हैं!
बिवाद कभी बराबर नहीं रहता,एक तरफ बढ़ ही जाता है!
बस दोनों कि दिशाएं अलग-अलग हैं
2 महीने पहले
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