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बेमतलब की बाते सोचता

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये क्या बेमतलब की बाते सोचता हूं मैं,
        
                                                    
                            
तू मेरा नहीं फ़िर क्यों तेरे बारे मैं सोचता हूं मैं।

तुझको देखना तक मेरे बस में नहीं,
और तेरे साथ रहने के ख्वाब देखता हूं मैं।

वो मंजर जो कभी मेरे होने का था ही नहीं,
उसी मंजर को मुसलसल देखता हूं मैं।

हद तो ये है कि मेरी तन्हाई भी गवाह हैं,
कि खुद को छोड़कर सिर्फ तुझे ढूंढता हूं मैं।

ये बेमतलब की बातें नहीं मेरा ही पागलपन है,
तू मेरा नहीं फ़िर भी तुझसे ही मोहब्बत करता हु मैं।
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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