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अपने अरमां निकालकर....

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने अरमां निकालकर रखना
        
                                                    
                            
दिल को पत्थर में ढालकर रखना

इश्क़ तो बेवफ़ा भी होता है
अपने आंसू संभालकर रखना

ये सलीका नहीं है महफ़िल का
अपनी बातें उछालकर रखना

आग बुझने न पाए सीने की
दुश्मनी को यूँ पालकर रखना

ठीक बाहर नहीं ये चादर से
'मित्र' पैरों को डालकर रखना
-मित्र ग़ाज़ियाबादी
 
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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