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याद मेरी आए तो मुस्कुराना

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब कभी याद मेरी आए तो मुस्कुराना।
        
                                                    
                            
मेरी कही बातों पर हो सके तो इतराना।।

तुम्हारी जिद्द आज भी सिर माथे पर मेरे।
दूर हूँ तो क्या हुआ हूँ तो तुम्हारा दीवाना।।

प्यार जब कभी उफान भर दे जिंदगी में।
कमरें का द्वार बन्द कर करना नाच गाना।।

तुम भी लिखती रहती और मैं भी लिखता।
मेरे पद चिन्हों पर चल कर नाम कमाना।।

इसी जिन्दगी में रहकर सुकून लेना चाहती।
तो तन्हाई में 'उपदेश' की तरह गुनगुनाना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
एक महीने पहले
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