विज्ञापन

वैसे तो सभी है तलाश-ए-सुकून में।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नींद आने से पहले ही याद आई।
        
                                                    
                            
बेकरारी की जिसने तादाद बढ़ाई।।

संदेश व्हाटसएप पर लिख डाला।
वापस उसकी आमोद-प्रमोद आई।।

अब इशारे कहाँ समझ पाते लोग।
कॉल करके विस्तृत मुराद समझाई।।

अल्फाजों का सहारा भारी प़डा।
जान बच नही पाई विवाद गहराई।।

जो दौर चल रहा है मुद्दा वो नही।
आने वाले वक्त में जद्दोजहद जताई।।

वैसे तो सभी है तलाश-ए-सुकून में।
पर झूठी शौहरत 'उपदेश' स्वाद लाई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile