विज्ञापन

तुम कैसे ठहर गए

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिन्दगी में 'उपदेश' कितने आए कितने गए।
        
                                                    
                            
लकीरों में थे ही नही फिर तुम कैसे ठहर गए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

S. L.

41 कविताएं

View Profile