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तकलीफ़ से कमाये निवाले

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पढ़ने लिखने के बाद नौकरी के लाले थे।
        
                                                    
                            
कितनी तकलीफ़ से कमाये गए निवाले थे।।

इश्क में मदहोश होकर जिल्लत उठाई गई।
नतीजा क्या ज्यादातर लोग दिमाग वाले थे।।

समझाने में दिक्कत कौन सी कमी रह गई।
खुद के रिश्ते में हर एक पहलू देखे भाले थे।।

दुख दर्द लिपटने लगे अल्हड बेलों की तरह।
जरूरी सवालों के जवाब समाज ने टालें थे।।

हकीकत में 'उपदेश' जमीन से जुड़ कर रहे।
परिवार ने समझदारी बनने के बीज डाले थे।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
22 घंटे पहले
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