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सुकून में ख्वाब आए

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            थोड़ा खुद से मिलने में अभाव आए।
        
                                                    
                            
नींद लो उससे सुकून में ख्वाब आए।।

थकान जायेगी मन की जिस्म की भी।
रात में ऐसी घड़ी मुकद्दर से पाँव लाए।।

रिश्ता कायम रहे रूह का रूह से अगर।
खुशकिस्मती से अंदर नये प्रभाव लाए।।

दिल के सूनेपन से वाकिफ हूँ 'उपदेश'।
तुम्हारे मकान का पता प्यारे भाव लाए।।

मैंने सुन रखा प्रेम दृष्टिहीन होता यारो।
जरूरत के हिसाब से अंदर स्वभाव लाए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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