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कुछ बेशकीमती लोग भी हैं इस मतलबी दौर में।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यहाँ हर एक पहर एक नया हादसा जरूर होता।
        
                                                    
                            
ऐसे हालातों में हर सुहानी शाम को गुरूर होता।।

मैं तुम्हारे साथ सादगी का पुतला बन कर आया।
तुम भी सादा मिली ऐसी हैसियत पर गुरूर होता।।

कोई यों ही नही चल देता किसी का साथ निभाने।
मयखाने में हर शख्स को हलका तो सुरूर होता।।

कुछ बेशकीमती लोग भी हैं इस मतलबी दौर में।
उन्हीं में से तुम एक 'उपदेश' मिलते ही सुरूर होता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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