विज्ञापन

उनके स्पन्दन से स्वतः चेहरों पर रंगोली होगी।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            साँसों की लय हर एक के अन्दर बदली होगी।
        
                                                    
                            
प्रेम के स्वर स्पन्दित होने पर हुई पहेली होगी।।

हथेलियों का एक दूसरे से टकराना मुनासिब।
आग बारिश के मिलन की रही ठिठोली होगी।।

ऐसी वेला में संगीत सुनने वाला कोई भी नही।
उनके स्पन्दन से स्वतः चेहरों पर रंगोली होगी।।

पृथ्वी आकाश का संगम हवा की उपस्थिति में।
सम्पूर्ण कायनात की 'उपदेश' सूरत बदली होगी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile