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सामाजिक मोह

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई रिश्तो में सामाजिक मोह होता।
        
                                                    
                            
अनबन होने पर टूटने का डर होता।।

समझौते में गुजारनी पड़ती जिन्दगी।
बनाई गई इज़्ज़त जाने का डर होता।।

रिश्तों का बोझ जब असहाय लगता।
करीबियों के छूट जाने का डर होता।।

उम्र हो गई अब सोचूँ तो हँसी आती।
मोहब्बत खुलने का 'उपदेश' डर होता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
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