अकेले में सोचती मेरे भीतर क्या है।
कभी शांत नही होता धड़कता क्या है।।
पता नही वह दर्द है घुटन है या आँसू।
मिली जुली धड़कती कामुकता क्या है।।
आँसू भी मेरे साथ समझौता कर चुके।
आँखों में भरे रहते रोने पर घुटे क्या है।।
चेहरे पर बह जाने से बदलने वाली नही।
आवाज भीतर गूँजती ये मुस्कान क्या है।।
मैं सामान्य ठीक हूँ विडम्बना नारी की।
भावनाएं कैद 'उपदेश' किताब सी क्या है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'