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प्यार अब भी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मौन होने की सजा मिली अधरों को तड़पाए।
        
                                                    
                            
अन्दर अन्दर कुछ कहते बाहर से मुस्कुराए।।

बिन शब्दों के जीना भी कोई जीना 'उपदेश'।
आँखें भी अब सूख गई पानी बहकर न आए।।

रही मोहब्बत फिर भी जाने का नाम नही लेती।
दिमाग समझ लिया मगर मन काबू में न आए।।

उसके हर साजिश की खबर से तबियत मचले।
प्यार अब भी आता मगर खुद की जिद्द न जाए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
6 दिन पहले
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Sanjai kumar

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