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प्रेम का समुन्दर

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं अकेला नही यादें साथ दे रही।
        
                                                    
                            
बाकी शिकायतें भी दम तोड़ रही।।

दिल को चुनना था मर्जी रही होगी।
बिना मर्जी के ख़ुदगर्जी छोड़ रही।।

समझा लिया होगा खुद को उसने।
दूर रहने के लिए इत्तफाक जोड़ रही।।

प्रेम का समुन्दर न जाने कैसे सूखा।
नदियाँ भी 'उपदेश' रास्ता मोड़ रही।।

किस तरह मुहुर्त निकाला मिलने का।
बड़े हक से कहा बेवफाई छोड़ रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 महीने पहले
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