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पेड़ हरा ही दिखा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खिड़की से झाँकने पर पेड़ हरा ही दिखा।
        
                                                    
                            
कल था और आज भी रहा वो मेरा सखा।।

कसम खुदा की उससे नाता मेरा पुराना है।
पढ़ न पाओगे वसीयत में उसका नाम लिखा।।

हर धड़कन के संग संग बात उसकी चलती।
फायदे की हैसियत उसने कभी नही परखा।।

उसमें है तुम्हारा अक्स छाँव आँचल के जैसी।
मौसम की वज़ह से पतझड़ में दिखता सूखा।।

एक बार देख लेता दिन सँवर जाता 'उपदेश'।
बेकारी में आईना देखूँ तो प्यार उसका दिखा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
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