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बस थोड़ी मोहब्बत ढूँढती

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नींद नही है आँखों में
        
                                                    
                            
जबरन आँखों को मूँदती
सब कुछ है पास मेरे
बस थोड़ी मोहब्बत ढूँढती

बिस्तर पर शांत चित्त
मन कभी यहाँ कभी वहाँ
तन्हाई के आलम में क्यों
आँखों की नमी क्या ढूँढती

आँखें बेवजह पथरा गई
ख्वाहिशें पूरी नही हो सकीं
बदलना चाहती राह 'उपदेश'
चौराहे पर आसरा ढूँढती
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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