समझेंगे कैसे लोग मायने सफाई के।
जब हर ओर दिखते मंजर तबाही के।।
नव जवानों के दिन पहले भी रहे होंगे।
विसलरी के दिन आये गए सुराही के।।
पसीना बहाने से पहले आत्मसात कर।
आसानी में नही पाते वर्दी सिपाही के।।
एक देश के नागरिक फर्ज अलग-अलग।
निकाल रहे अंतरंग अर्थ तानाशाही के।।
अधिकार गटकने की कोशिश नाकाम।
आये अब दिन 'उपदेश' नीली स्याही के।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'