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नई पीढ़ी का ज़माना

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब हम भी घर से कम निकलते हैं।
        
                                                    
                            
धीरे-धीरे चाल-चलन को बदलते हैं।।

उम्रदराज की शिकायत वाजिब होगी।
मँहगाई में घर के चूल्हे कैसे जलते हैं।।

बरबादी का आलम शिक्षित जान पाया।
उनकी हुंकार से सत्ता के किले हिलते है।।

जिस तरह से बहलाए जा रहे थे 'उपदेश'।
उनके प्रभाव में आकर वही हाथ मलते है।।

नई पीढ़ी का ज़माना आने वाला समझ।
दीमक की तरह चट कर रहे उनसे डरते हैं।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
11 घंटे पहले
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