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मोहब्बत से अनजान नही

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मोहब्बत से अनजान नही मगर इज़्ज़त प्यारी।
        
                                                    
                            
इतना तो सीख गई थी 'उपदेश' से करके यारी।।

धीरे-धीरे दीवानापन बखूबी रंग में आने लगा।
तन्हाई हुई उस शख्स की चाह के नशे की मारी।।

हमारे दिन गुजरने लगे बेहद सब्र से खामोशी से।
तमाम राते कटने लगी असहाय करवटो की मारी।।

मेरे कहने का तात्पर्य मैं खुद ही नही समझ पाई।
मोहब्बत की साजिश चल रहीं आकर्षण की मारी।।

इंतजार किस तरह गुजरा गुजारा ना गया मुझसे।
ख़ुदगरज हो चुकी थी इंसानियत तड़पन की मारी।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
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