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मोहब्बत है नही

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या क्या हासिल करोगे मोहब्बत है नही।
        
                                                    
                            
प्रेम मिलेगा कैसे इन्सानी इबादत है नही।।

जो इंसान चाहा मिला और मिला भी नही।
अन्दर झाँको जरा वफ़ा की आदत है नही।।

जिसके साथ बांटना चाहा सुख दुख आगे।
सब कुछ गुरुर ने लील लिया दौलत है नही।।

जिन्दगी में निशानियाँ माने रखती 'उपदेश'।
यादों के साथ रोते रहने की ताकत है नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 महीने पहले
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