विज्ञापन

मोहब्बत चाहकर ना हुई

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उमर भर साथ रहे मोहब्बत चाहकर भी ना हुई।
        
                                                    
                            
ख्वाब तड़पते रहे 'उपदेश' मेरे संग साज़िश हुई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

S. L.

41 कविताएं

View Profile