विज्ञापन

मेरे ख्वाब

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे ख्वाब आँखो के आँसुओं से नही बहते।
        
                                                    
                            
परेशानियाँ कितना तोड़ेगी हम नही बदलते।।

इतनी अनुभवी भी नही कि आगे का देख लूँ।
राह कैसी भी मिल जाए हम पैर नही पटकते।।

हमसफ़र मिल ही जाते दुख दर्द बाँट लेते हम।
जल्दबाजी में दिल की बाजी लगाने से बचते।।

चेहरे पर नकाब शायद हर कोई लगाए रहता।
जो नही लगाता 'उपदेश' उनके चेहरे दमकते।।

ताप और शीतलता दोनों जरूरी होती राह में।
मंजिल मिलने की आशा के लिए धैर्य रखते।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all