स्वतंत्रता दिवस पर हम झंडा फहराते।
अपनी खुशी में इतराते किसे जलाते।।
लोग तकल्लुफ करते य़ह कहने का।
जुलूस निकलकर बताते किसे जलाते।।
शहीद जिंदा महसूस होते महफ़िल में।
उन्हीं के लिए नारे लगाते किसे जलाते।।
जेन जी जेन अल्फा बने रंग की खुशबू।
होली की तरह फैला कर किसे जलाते।।
जलेंगे वही जो ग़द्दार सत्ता में 'उपदेश'।
अन्दर ही अन्दर सुलगते खुद को जलाते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'