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मोहब्बत के सिवाय सब कुछ मिला दुनिया से।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी डर जनता में रहा आज सत्ता डरी।
        
                                                    
                            
लाठियां उठाई गई मगर जनता ना डरी।।

शांति आंदोलन में इतना बल किस लिए।
जवान पर हिंसा हुई मगर जनता ना डरी।।

हँसते हँसते सह लिया मगर हौसला रखा।
धुँआ बढ़ता गया फिर भी जनता ना डरी।।

तरह-तरह के आदेशों पर सवाल खड़े हुए।
जेलों में भी भेजे गए मगर जनता ना डरी।।

अवमानना लगाई गई माफ़ी लेकर पहुंचे।
डराने की हर कोशिश मगर जनता ना डरी।।

कितना झूठ परोसा अखबारो में 'उपदेश'।
मोहब्बत के सिवाय सब कुछ मिला दुनिया से।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
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