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इशारों की भाषा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो रह नही पाता बहाने खोजता हर रोज।
        
                                                    
                            
विचार टकरा कर रुक गए राह में एक रोज।।

मन बेचैन होने लगा देखकर उसकी अदाएं।
दोनों हाथ की पहली उँगली मिली उस रोज़।।

इशारों की भाषा किसने सिखाई होगी उसे।
हल जब मिला तो देखता रह गया उस रोज़।।

लिखाई पढ़ाई की मगर काम में आई नही।
यौवनावस्था की भँवर घुमाती रही उस रोज़।।

मौक़ा खुदा देता 'उपदेश' सारे किस काम के।
मोहब्बत सच्ची करीब से मिल गई उस रोज़।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
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