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हर कोई दुखी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई साथी से दुखी कोई तन्हाई से दुखी।
        
                                                    
                            
हर कोई यहाँ अपने अपने तरीके से दुखी।।

दोस्त चौखट पर दरवाजा खटखटाता रहा।
मलिन मन अपने शौहर के इंतजार से दुखी।।

हो जाए मन कमजोर तो दम मिले दिल को।
चल पाए दो कदम जिस्म कमजोरी से दुखी।।

अपनी उम्र का अंदेशा नही जोशीला जनाब।
दूर की नजर कमजोर 'उपदेश' चश्मे से दुखी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
10 घंटे पहले
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