विज्ञापन

गुफ़्तगू के लिए अपना लहजा बदल जरा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने पन्ने पलटने से पहले निकाल जरा।
        
                                                    
                            
गुफ़्तगू के लिए अपना लहजा बदल जरा।।

तुम्हारी जगह ठीक मैं ही जंजाल में फंसा।
किसी का तूँ होगा अजीज पाला बदल जरा।।

भीड़ से अलग होने में वक्त लगेगा तुझे भी।
दिखने लगेगा राह अपना ख्याल बदल जरा।।

प्यासे के पास दरिया आता नही कभी यहाँ।
गला सींचने के लिए अपनी चाल बदल जरा।।

मोहब्बत छुपाता क्यों 'उपदेश' पहल तो कर।
कदम के आगे मंजिल अपने कदम बदल जरा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all