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गर्मी से व्यथित

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर्मी ने व्यथित कर रखा था नींद को।
        
                                                    
                            
और जिस्म चाहता रहा मनमीत को।
करवटों के बीच बिजली का चमकना।
घटाओ ने तरस खाकर छेडा गीत को।
बादलों का इस तरह आकर बरसना।
उपहार दे गई, 'उपदेश' की जीत को।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
4 वर्ष पहले
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