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फूल कुँवारे रहते

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर किसी शख्स को यहाँ अपना नही कहते।
        
                                                    
                            
खुशबू भिन्न-भिन्न फिर भी फूल कुँवारे रहते।।

अगर देखा होगा हश्र भरोसेमंद का जनाब।
बेज़ा व्यवहार करने वाले ही दीवार बने रहते।।

मोहब्बत की फिक्र उलझन थकान बन गई।
ज्यादातर पीछे पड़ने वाले मतलबी बने रहते।।

हर कोई अपने को होशियार बनाये भी कैसे।
सीखने की वज़ह से 'उपदेश' बीमार बने रहते।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
2 महीने पहले
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