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बेकरारी में रूह

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिना छुए ही नाम धड़कने बढ़ा देता।
        
                                                    
                            
एहसास जब आता चेहरा खिला देता।।

ऐसे रिश्तो को जिस्म की जरूरत नही।
बेकरारी में रूह से रूह को मिला देता।।

अतरंगे प्रेमी प्रेमिका खामोशी पढ़ लेते।
गलतियों के बावजूद सुकून पिला देता।।

दर्द की गहराई उभरी होगी दोनों तरफ।
नाजुक पलो में खुशियो का सिला देता।।

नसीब वालों को मिला रूह का रिश्ता।
ग़म भुलाकर 'उपदेश' मौज दिला देता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
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