विज्ञापन

तजुर्बा मिलेगा कैसे 'उपदेश' बिना ताकत के।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बदनाम करने वाले भूखे होते मोहब्बत के।
        
                                                    
                            
दाल कहीं नही गलती छटपटाते चाहत के।।

हर जगह चर्चा करते थकते नही ऐसे लोग।
जीभ माँगे स्वाद बनते संयमित आदत के।।

खुद को दरिया समझते रास्ता बनाते खुद।
किनारे तोड़ कर चलते दिखावे इबादत के।।

मुझे मिटाना चाहते तमाम कोशिशों के बाद।
तजुर्बा मिलेगा कैसे 'उपदेश' बिना ताकत के।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10991 कविताएं

View Profile