विज्ञापन

आईना वही रहा

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आईना वही रहा सूरत बदल रही।
        
                                                    
                            
उम्र की साजिश सब को छल रही।।

मन मिले कहते रहे आजतक हम।
झाँक कर देखा हिम्मत पिछल रही।।

दूरियों की वज़ह से मन खिन्न रहता।
बात भी होती नही परछाई ढल रही।।

कोशिश करने पर हार नही होती।
जीतने की चाह में इच्छा मचल रही।।

जो कल था वो आज नही 'उपदेश'।
खुशियाँ चुपके-चुपके निकल रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

dinesh chauhan

3544 कविताएं

View Profile

Saanvi Dubey

7 कविताएं

View Profile