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कोई तुझसा नहीं

Tushar Sirra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नजरे कहां ले जाऊं कोई तुझसा नहीं
        
                                                    
                            
अपना किसे कहुँ कोई तुझसा नहीं

लाख होंगे दर्द जमाने में मगर
बात मरहम पे आई तो कोई तुझसा नहीं

रोज मरता हु तो दफना भी दूं खुदको मगर
राख से फूल उठाने वाला कोई तुझसा नहीं

तारो को शिकायत है अब हम बात नहीं करते
कैसे करलू बात कोई तुझसा नहीं

जमाने से लड़ जाता तेरे लिए
तेरे सामने झुक गया कोई तुझसा नहीं

भूलने पे आऊं तो खुद को भूल जाऊं मगर
मं तुझमें खोया हु कोई तुझसा नहीं
2 महीने पहले
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