उनके जौहर को कायरता वो ही कहे
जिसकी रग में रुधिर धार दो-दो बहे
वो क्या समझेंगे पद्मिनियों के त्याग को
गैर-मज़हब का दामाद जो चुन रहे
— त्रिशिका धरा