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निगाहें सुर्ख़ रहती हैं

Trishika Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निगाहें सुर्ख़ रहती हैं, जिगर में बे-क़रारी है;
        
                                                    
                            
मुझे कहते हैं, चारा-गर, तू मर्ज़-ए-दिल की मारी है।
दवाएँ भी नहीं लगतीं, दुआएँ भी नहीं लगतीं;
मुझे इक पीर ने बोला, ये उल्फ़त की बीमारी है।
— त्रिशिका धरा
2 महीने पहले
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